हमारी दृष्टि
एक ऐसा भारत जहाँ हर दिहाड़ी मज़दूर को घर के पास स्थिर और सम्मानजनक काम मिले, और हर परिवार व व्यवसाय मिनटों में भरोसेमंद कामगार रख सके।
श्रमसेतु दिहाड़ी मज़दूरों को पास के काम से जोड़ता है, हुनर, रेटिंग, अनुभव और इलाके के हिसाब से। सत्यापित। पारदर्शी। सेवा-प्रथम।
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मज़दूर पूरी सुबह लेबर चौक पर काम की गारंटी के बिना इंतज़ार करते हैं। काम देने वालों को पास में हुनरमंद, भरोसेमंद कामगार नहीं मिलते। बिचौलिये कमीशन लेते हैं, मज़दूरी अंदाज़े से तय होती है, और न कोई आईडी जाँच है न कार्य-रिकॉर्ड। ई-श्रम मज़दूरों को पंजीकृत करता है, पर काम नहीं दिलाता।
19.8%
भारत के कामगार कैज़ुअल हैं (PLFS 2023-24, MoSPI)
85 लाख+
छत्तीसगढ़ में ई-श्रम पर पंजीकृत असंगठित मज़दूर
आसान कदम, आपकी भाषा में, आवाज़ या टच से।
मोबाइल नंबर से साइन-अप करें
अपनी प्रोफ़ाइल बनाएँ: हुनर, दिहाड़ी, इलाका
अपनी आईडी से सत्यापित हों
अपने पास के काम के अनुरोध स्वीकार करें
पूरी मज़दूरी पाएँ और रेटिंग कमाएँ
निर्माण और खेती से लेकर घरेलू काम, मरम्मत, इवेंट और ड्राइविंग तक।
हर सुबह लाखों असंगठित मज़दूर लेबर चौक पर बिना काम की गारंटी के इंतज़ार करते हैं, और घर-परिवार व व्यवसायों को पास में भरोसेमंद, हुनरमंद लोग नहीं मिलते। श्रमसेतु इन दोनों के बीच का पुल है: एक सरल, आवाज़-सहायता वाला ऐप जो हर क्षेत्र के काम में भर्ती को तेज़, उचित और सुरक्षित बनाता है।
एक ऐसा भारत जहाँ हर दिहाड़ी मज़दूर को घर के पास स्थिर और सम्मानजनक काम मिले, और हर परिवार व व्यवसाय मिनटों में भरोसेमंद कामगार रख सके।
मज़दूर को पूरी मज़दूरी मिलती है। हम केवल पूरे हुए काम पर हायरर से मामूली शुल्क लेते हैं।
आईडी-सत्यापित प्रोफ़ाइल, वैकल्पिक पुलिस सत्यापन, और हुनर व व्यवहार पर रेटिंग।
सत्यापित डिजिटल कार्य-रिकॉर्ड, ताकि हुनरमंद हाथ अदृश्य न रहें।
आवाज़-प्रथम, हिंदी-प्रथम, पहली बार स्मार्टफ़ोन चलाने वालों के लिए।
श्रमसेतु की अवधारणा तैयार कर सेवा इनोवेशन चैलेंज 2026 में प्रस्तुत की गई।
श्रमिक व हायरर ऐप, एडमिन पैनल और सत्यापन प्रक्रिया बनाई व परखी गई।
ऐप लॉन्च करना और एक शहर में श्रमिकों को जोड़ना।
श्रम विभाग व स्थानीय साझेदारों के साथ रायपुर-भिलाई-दुर्ग के उपनगरों में पायलट।
पंचायतों, सीएससी और आईटीआई के ज़रिए छोटे शहरों और गाँवों तक विस्तार।
पहले साल का लक्ष्य: 5,000+ सत्यापित श्रमिक और 50,000+ कार्यदिवस।
श्रमिक कभी कुछ नहीं देते। उन्हें पूरी दिहाड़ी सीधे काम देने वाले से मिलती है।
काम देने वाले केवल बुकिंग पूरी होने के बाद ₹10 का छोटा सुविधा शुल्क देते हैं।
हमारी टीम सरकारी पहचान पत्र जाँचती है। वैकल्पिक पुलिस सत्यापन पर शील्ड बैज मिलता है।
हर काम के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे को रेटिंग देते हैं: हुनर, व्यवहार और कुल अनुभव।
फ़ोन नंबर और पूरा पता केवल श्रमिक के स्वीकार करने के बाद ही साझा होता है।
Founder
B.Tech student, CGIT Raipur. A seva-first startup from Chhattisgarh for its daily-wage workers.
Faculty Mentor
Head of Department, EEE, CGIT Raipur. PhD, IIT Bombay.
सवाल, साझेदारी या सुझाव: हमें आपकी बात सुनकर खुशी होगी।